वाराणसी/लखनऊ | शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म और गो-रक्षा के लिए ‘चतुरंगिणी सेना’ बनाने की घोषणा की है। इस सेना का नेतृत्व स्वयं शंकराचार्य करेंगे और इसमें साधु-संतों के साथ आम श्रद्धालुओं को भी शामिल किया जाएगा।प्रस्तावित सेना के योद्धा पीले रंग की वेशभूषा पहनेंगे और उनके हाथों में पारंपरिक शस्त्र जैसे तलवार और भाले होंगे। बताया जा रहा है कि यह सेना धर्म और परंपराओं की रक्षा के उद्देश्य से संगठित की जाएगी।
शंकराचार्य के अनुसार “चतुरंगिणी” का अर्थ चार प्रकार की शक्तियों से है— बुद्धिबल, बाहुबल, धनबल और जनबल। इन चारों के आधार पर इस संगठन को मजबूत किया जाएगा।इस घोषणा के साथ ही गो-रक्षा और सनातन जागरण के लिए देशभर में अभियान चलाने की बात भी कही गई है। आने वाले समय में इस सेना की संरचना और कार्यक्रमों की विस्तृत योजना सामने आ सकती है।

