स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार सुबह काशी स्थित श्रीविद्यामठ से शंखनाद कर गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर अपने ‘धर्मयुद्ध’ अभियान की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचकर विधिवत दर्शन-पूजन किया।शंकराचार्य ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि धर्म और गौमाता की प्रतिष्ठा के लिए उन्हें धर्मयुद्ध का मार्ग अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है।अपने कार्यक्रम के तहत शंकराचार्य पहले चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे और पूजन किया। इसके बाद वे संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंगबाण का पाठ किया तथा गोरक्षक भगवान हनुमान से इस अभियान की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा।
शंकराचार्य ने कहा कि अब धर्मयुद्ध प्रारंभ हो चुका है और जिस जिले में यह अभियान पहुंचेगा, वहां के सांसद और विधायक को स्पष्ट करना होगा कि वे गौमाता के पक्ष में हैं या विरोध में। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग गौमाता की रक्षा चाहते हैं और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं।कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य के लगभग 500 अनुयायी अपने-अपने वाहनों से काशी से लखनऊ के लिए रवाना हुए। संकट मोचन मंदिर में पूजा-पाठ के बाद शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।
इस बीच संकट मोचन मंदिर परिसर में शंकराचार्य से बातचीत के दौरान कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की घटना भी सामने आई, जिससे कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


