वाराणसी के एक बड़े प्रॉपर्टी डीलर को निशाना बनाते हुए ठगों ने 16.62 करोड़ रुपये की सुनियोजित ठगी को अंजाम दिया। यह मामला न सिर्फ रकम के कारण बड़ा है, बल्कि इसमें इस्तेमाल किए गए तरीकों ने रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है।जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने गोवा में एक प्राइम लोकेशन की जमीन को अपनी बताकर डीलर से संपर्क किया। भरोसा जीतने के लिए उन्होंने जमीन से जुड़े नकली लेकिन बेहद पेशेवर तरीके से तैयार किए गए दस्तावेज दिखाए। सरकारी रिकॉर्ड जैसे दिखने वाले कागजात और रजिस्ट्री प्रक्रिया ने पूरे सौदे को वैध साबित कर दिया।ऐसे रचा गया पूरा खेल पहले हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी का लालच दिया गयाफिर फर्जी मालिक बनकर जमीन दिखाई गई नकली दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने के बाद आरोपी गायब हो गए कब्जा लेने पहुंचे तो खुला राज जब पीड़ित डीलर जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा, तो वहां पहले से मौजूद असली मालिक ने आपत्ति जताई।
यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया कि जमीन किसी और के नाम पर थी और रजिस्ट्री पूरी तरह फर्जी दस्तावेजों के जरिए कराई गई थी।पुलिस जांच में बड़े खुलासे के संकेत मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह एक इंटरस्टेट संगठित गिरोह का काम माना जा रहा है, जिसमें प्रॉपर्टी, रजिस्ट्री और दस्तावेजों की गहरी जानकारी रखने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार:कई संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ठगी की कड़ियां जुड़ सकती हैंविशेषज्ञों की चेतावनीरियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि: सिर्फ रजिस्ट्री होना ही जमीन की वैधता की गारंटी नहीं है स्थानीय प्रशासन और भूमि अभिलेखों से क्रॉस-वेरिफिकेशन जरूरी हैबड़े निवेश से पहले स्वतंत्र कानूनी जांच कराना अनिवार्य है

