‘नमन’ सांगीतिक अनुष्ठान में तीन पीढ़ियों के सितार वादन ने जीवंत की गुरु-शिष्य परंपरा

बनारस घराने के श्रद्धेय गुरुजनों और महान कलाकारों को समर्पित सांगीतिक अनुष्ठान ‘नमन’ की दूसरी निशा गुरु-शिष्य परंपरा के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। कार्यक्रम का आयोजन नगरी नाटक मंडली सभागार में संगीत परिषद काशी द्वारा किया गया, जहां कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से गुरुओं को नमन किया।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्रा का सितार वादन रहा। उन्होंने अपनी तीन पीढ़ियों—पुत्र पंडित देवब्रत मिश्र, पौत्र कृष्णा मिश्रा तथा शिष्य वत्स अग्निहोत्री के साथ मंच पर सितार की सुरलहरियाँ बिखेरीं। कलाकारों ने राग गोरख कल्याण में रूपक ताल की बंदिश प्रस्तुत की, जिसके बाद तीनताल में बंदिश और अंत में बनारसी दादरा  की धुन सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर प्रशांत मिश्र और तानपुरे पर बेल्जियम के सेप्पे ने संगत की।

कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय गायिका डॉ रेवती साकलकर की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने राग पहाड़ी में ठुमरी, राग कौशिक ध्वनि में दादरा, होली गीत तथा अंत में चैती प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके साथ सितार पर आनंद मिश्र, तबले पर प्रीतम मिश्र, हारमोनियम पर पंकज मिश्र और मार्कस पर प्रांजलि ने संगत की।तीसरी प्रस्तुति बनारस घराने के युवा कथक नर्तक सौरव-गौरव मिश्र बंधु की रही। उन्होंने शिव स्तुति से शुरुआत कर पारंपरिक तिहाई, टुकड़े, आमद और चक्करदार बंदिशों पर कथक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद सुप्रसिद्ध बंदिश ‘काशी के खेवइया, पर नृत्य कर गुरुजनों को नमन किया। इस प्रस्तुति का निर्देशन पं. रविशंकर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सप्तक की महिलाओं द्वारा गणेश वंदना से हुआ। इस अवसर पर संगीत परिषद काशी के अध्यक्ष विनय जैन, महासचिव विनोद अग्निहोत्री, सुचरिता गुप्ता, संजय मेहता, सुरेंद्र मिश्रा शीलू और जेबीएल के दिव्यांश सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इस दौरान कलाकारों के लिए वाद्य यंत्र तैयार करने वाले कारीगरों को भी सम्मानित किया गया। हारमोनियम निर्माता लक्ष्मीनारायण और राजकुमार एंड कंपनी तथा तबला निर्माता जगन्नाथ प्रसाद के कारीगरों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।



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