दशाश्वमेध घाट स्थित सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतला माता भाई धाम में आयोजित पांच दिवसीय संगीत समारोह के तृतीय निशा में भक्ति, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगा तट पर आयोजित इस भव्य आयोजन में देर रात तक कलाकारों ने गायन, वादन और नृत्य के माध्यम से मां शीतला की आराधना की। कार्यक्रम की शुरुआत माता शीतला के भव्य श्रृंगार, पूजन और आरती के साथ हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक सत्र प्रारंभ हुआ। संध्या का शुभारंभ दिलीप शंकर एवं उनके साथियों ने शहनाई की मधुर मंगलध्वनि से किया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।कथक नृत्यांगना मांडवी सिंह और शांभवी सेठ के युगल कथक नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। तबला पर अवंतिका महाराज और पं. भोलानाथ मिश्र ने शानदार संगत दी, जबकि गायन में आनंद किशोर मिश्रा और बोल-पढ़ंत में डॉ. ममता टंडन का विशेष योगदान रहा। अदिति शर्मा और दिव्यंका श्रीवास्तव ने भी अपनी कथक प्रस्तुति से सराहना बटोरी।
भजन संध्या में डॉ. विजय कपूर ने चैती तथा हनुमान जयंती पर आधारित भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। लोक गायिका ज्योति माही ने भजन की मार्मिक प्रस्तुति दी।इसके अलावा लकी राय, महिमा और अनुराग आर्य ने भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रंजन राय, राघव पांडेय, चंद्रभूषण त्रिपाठी, सोनू यादव, पवन दीवान, श्रीपति मिश्रा, बली बवाली सहित अनेक कलाकारों ने अपनी भजनांजलि अर्पित की। संगत में तबला पर पं. बलराम मिश्र, मोती शर्मा, गौरीश श्रीवास्तव, ढोलक पर सनी, विशाल, अवधेश, कीबोर्ड पर भैरव, पैड पर अनिल और विवेक, तथा बैंजो पर कलाकारों ने उत्कृष्ट सहयोग प्रदान किया।गंगा तट पर पूरी रात गूंजते भजनों और मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।

