काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का स्थायीकरण की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण आंदोलन गुरुवार को 8वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने मधुबन परिसर में कैंडल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। इससे उनकी नौकरी असुरक्षित बनी हुई है और वे कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें शीघ्र स्थायी किया जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते उन्हें मधुबन परिसर के भीतर ही सीमित दायरे में अपने कार्यक्रम आयोजित करने पड़े।
कर्मचारियों ने बताया कि वे पहले पैदल मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन अनुमति न मिलने पर उन्होंने परिसर के भीतर ही मार्च कर अपनी एकजुटता दिखाई। इसके बाद उन्होंने कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्वक अपनी मांगों को दोहराया। इस दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी या हंगामा नहीं किया गया।प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और आमरण अनशन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन देने और संवाद की कोशिशों के बावजूद कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।फिलहाल आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण बना हुआ है और कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे अहिंसात्मक तरीके से अपनी मांगों को उठाते रहेंगे।

