काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में आदिवासी छात्र-छात्राओं द्वारा “आदिवासी धर्म कोड: अस्तित्व, पहचान और अधिकार” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान छात्रों ने जातिगत जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कोड न होने पर चिंता जताई।छात्रों ने कहा कि 1 अप्रैल से शुरू हुई जनगणना में विभिन्न धर्मों के विकल्प तो दिए गए हैं, लेकिन आदिवासी धर्म के लिए अलग कॉलम नहीं है, जिससे उन्हें “अन्य” श्रेणी में शामिल होना पड़ता है। इससे उनकी वास्तविक पहचान और जनसंख्या स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाती।
बैठक में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासी धर्म कोड की व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में उनकी संस्कृति, भाषा, परंपराएं और धार्मिक पहचान पर संकट गहरा सकता है, साथ ही सामाजिक विखंडन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।छात्रों ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आदिवासी समुदाय को भी अलग धर्म कोड मिलना चाहिए।बैठक में राहुल पावरा, पी.डी. मीणा, अर्जुन उरांव, मोहन मांडवी सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

