शंकराचार्य ने कहा कि काशी एक ऐसी पवित्र नगरी है, जहाँ “मृत्यु भी महोत्सव” मानी जाती है। उन्होंने अपने संबोधन में काशी की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहाँ जीवन और मृत्यु दोनों को उत्सव के रूप में देखा जाता है।
इस दौरान शंकराचार्य ने गो-रक्षा के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गो-रक्षा के मामले में सरकारें अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही हैं। उन्होंने इस विषय पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।कार्यक्रम के दौरान वर्षों पुराने मंदिर में विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन भी किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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