काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहा। नियमितीकरण और जूनियर क्लर्क भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग को लेकर कर्मचारी लगातार धरना दे रहे हैं। सोमवार शाम को शांतिमार्च की अनुमति नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने धरनास्थल मधुबन में ही शांतिपूर्वक मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया।आंदोलन में कुल 1199 कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिला कर्मियों की है। महिलाएं भी धरनास्थल पर लगातार मौजूद रहकर आंदोलन को मजबूती दे रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर अब आरपार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि बीएचयू प्रशासन ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का दबाव बनाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अडिग हैं और जूनियर क्लर्क भर्ती प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं।वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर पहले से गठित समिति कार्य कर रही है। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में मामले पर विचार कर रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन ने संविदा कर्मियों से जल्द कार्य पर लौटने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत के तहत कार्रवाई की जाएगी।

