75% क्राइटेरिया ने बढ़ाई टेंशन: JEE Main में 99 पर्सेंटाइल लाने वाले छात्र भी IIT एडमिशन से बाहर होने के कगार पर

CBSE 12वीं रिजल्ट के बाद बढ़ी छात्रों की चिंता, जेइ एडवांस्ड से पहले हजारों स्टूडेंट्स दुविधा में सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों के बाद छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। इस साल पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के चलते पास प्रतिशत घटकर 85.20% रह गया, जो पिछले सात वर्षों में सबसे कम है।इसी बीच, रविवार 17 मई को होने वाली जेइ एडवांस्ड परीक्षा से पहले हजारों छात्र असमंजस में हैं। कई मेधावी छात्रों ने JEE Main में 90 से 99 पर्सेंटाइल तक अंक हासिल किए हैं और एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई भी कर चुके हैं, लेकिन वे बोर्ड परीक्षा में 75% अंकों का अनिवार्य क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाए हैं।

ऐसे में देश के प्रतिष्ठित IIT और NIT संस्थानों में प्रवेश का सपना अधूरा पड़ता नजर आ रहा है। छात्रों का कहना है कि अब उनके लिए जेइ एडवांस्ड देना “शामिल होने या न होने के बराबर” बन गया है।छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि इस बार लागू की गई सख्त स्टेप-वाइज मार्किंग प्रणाली के कारण कई छात्रों के अंक कट गए। खासकर फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथ्स जैसे विषयों में इसका असर अधिक देखने को मिला।

सीबीएसई ने इस साल से 10वीं के छात्रों को दो बार परीक्षा देने और तीन विषयों में सुधार परीक्षा का विकल्प दिया है। वहीं 12वीं के छात्रों को केवल एक विषय में सुधार परीक्षा देने की अनुमति है।
विज्ञान वर्ग के जिन छात्रों के PCM (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स) में कम अंक आए हैं, उनके लिए सिर्फ एक विषय में सुधार परीक्षा देकर 5% से 10% तक का अंतर भरना लगभग असंभव माना जा रहा है।
सीबीएसई ने बताया कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया 18 मई से तीन चरणों में शुरू होगी—
• मार्क्स वेरिफिकेशन: ₹500 प्रति विषय 
• स्कैन कॉपी: ₹700 प्रति उत्तर पुस्तिका 
• री-इवैल्यूएशन: ₹100 प्रति प्रश्न 

अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि जब कॉपियां डिजिटल माध्यम से जांची गई हैं, तो इतनी अधिक फीस क्यों ली जा रही है। उनका कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कई विषयों में री-इवैल्यूएशन कराना आर्थिक रूप से मुश्किल होगा।
सीबीएसई ने फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी और मैथ्स में कम अंकों को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि OSM प्रणाली पारदर्शी और स्टेप-वाइज मार्किंग सुनिश्चित करती है।
बोर्ड के अनुसार, जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं, वे जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी प्राप्त कर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।


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