वाराणसी। गुजरात सरकार के पूर्व गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा अपने पारिवारिक प्रवास के दौरान काशी पहुंचे, जहां उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन-पूजन के उपरांत वह सप्तसागर कर्णघण्टा स्थित गुर्जर छात्र सहायक समिति के भवन पहुंचे और वहां रह रहे बटुकों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया।इस अवसर पर श्री काशी गुजराती समाज की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में प्रदीप सिंह जडेजा का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित समाज के लोगों ने उनका स्वागत करते हुए काशी और गुजरात के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा की।सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम का अभूतपूर्व विकास हुआ है।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुविधा प्राप्त हो रही है। कॉरिडोर की भव्यता और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं।उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर उन्हें आत्मिक शांति और विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति हुई है। काशी की पावन धरती पर आना हर श्रद्धालु के लिए सौभाग्य की बात है। यहां की संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण पूरे देश को जोड़ने का कार्य करता है।प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि वाराणसी में निवास कर रहे गुजराती समाज के लोगों से मिलकर उन्हें अत्यंत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि गुजरात और काशी का संबंध केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है।
देश के विभिन्न राज्यों में बसे गुजराती समाज के लोगों से उनका लगातार संवाद होता रहता है और ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बटुकों से शिक्षा, संस्कार और भारतीय परंपराओं के संरक्षण पर चर्चा की तथा उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं उपस्थित लोगों ने भी काशी में गुजराती समाज की गतिविधियों और सामाजिक योगदान की जानकारी दी।समारोह में शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, मुकेश जैन, बाबूभाई पटेल, दिनेश बजाज, अनिल शास्त्री सहित गुजराती समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहां समाज के लोगों ने अतिथियों के साथ संवाद कर काशी और गुजरात के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया।


