धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में मंगलवार को गंगा दशहरा पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। दशाश्वमेध, अस्सी, राजेंद्र प्रसाद, पंचगंगा समेत विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मां गंगा में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा स्नान और दान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है, इसी कारण इसे “गंगा दशहरा” कहा जाता है।
श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर दीपदान, फल, वस्त्र और अन्न का दान कर पुण्य अर्जित किया।गंगा दशहरा के अवसर पर पुरानी लोक परंपराओं की भी चर्चा रही। पहले महिलाएं “गुड़्डा-गुड़्डी” की प्रतीकात्मक शादी कर उन्हें गंगा में प्रवाहित करती थीं। ऐसी मान्यता थी कि इससे कुंवारे युवक-युवतियों के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
हालांकि बदलते समय के साथ यह परंपरा अब धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और जल पुलिस की विशेष तैनाती रही। श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और गंगा मैया के जयकारों के साथ पर्व को भक्तिमय माहौल में मनाया।


