उत्तर प्रदेश में कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सरल और विश्वास आधारित बनाने की दिशा में सरकार ने नए निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य कर विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट किया कि राजस्व वृद्धि के साथ ईमानदार व्यापारियों को सुविधा और सम्मान देना प्राथमिकता होनी चाहिए।बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में कर विभाग की भूमिका बेहद अहम है। इसके लिए कर प्रशासन को तकनीक आधारित, जवाबदेह और व्यापारी-हितैषी बनाया जाना जरूरी है।
उन्होंने जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, अपील निस्तारण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं में देरी खत्म करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को व्यापारियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और जिला व खंड स्तर पर करदाता सहायता कार्यक्रम चलाने को कहा, ताकि छोटे व्यापारियों को भी आसानी से सहायता मिल सके। साथ ही, डेटा एनालिटिक्स और तकनीक के जरिए कर चोरी पर सख्ती से रोक लगाने और वैध कारोबार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश ने जीएसटी और वैट के तहत 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। जीएसटी बकाया और प्रवर्तन वसूली में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।मुख्यमंत्री ने फर्जी फर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने और डेटा आधारित निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि कर प्रणाली को ऐसा बनाया जाए, जिससे ईमानदार करदाताओं को राहत और भरोसा दोनों मिलें।


