वाराणसी। मौजूदा समय में समाज में बढ़ती वैचारिक और सामाजिक दूरियों को लेकर चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी संदर्भ में इस्लामिक स्कॉलर ए.बी. नदी ने सामाजिक सद्भाव और इस्लामी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दौर में सामाजिक सामंजस्य को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें अधिक देखने को मिल रही हैं, जो समाज में अविश्वास और विभाजन की भावना को बढ़ावा देती हैं। जबकि भारत जैसे देश में, जहां विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं, वहां सामाजिक सामंजस्य शांति और प्रगति की बुनियाद है।ए.बी. नदी ने बताया कि भारतीय समाज सदियों से “विविधता में एकता” का उदाहरण रहा है, लेकिन कुछ सामाजिक और राजनीतिक कारणों से यह संतुलन प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व अपने निजी लाभ के लिए समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंच रहा है।
इस्लामी दृष्टिकोण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम समानता, सहिष्णुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश देता है। कुरआन में मानव विविधता को ईश्वरीय योजना का हिस्सा बताया गया है और इसका उद्देश्य लोगों के बीच पहचान, समझ और सहयोग को बढ़ाना है, न कि विभाजन करना।उन्होंने कुरआन की एक आयत का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी इंसान एक ही स्रोत से उत्पन्न हुए हैं और उन्हें अलग-अलग जातियों और समुदायों में इसलिए बांटा गया है ताकि वे एक-दूसरे को समझ सकें और सम्मान दें।ए.बी. नदी के अनुसार, सामाजिक सामंजस्य केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक नैतिक और धार्मिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति, विशेषकर मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में शांति, आपसी सम्मान और भाईचारे के संदेश को बढ़ावा दें।अंत में उन्होंने अपील की कि समाज के सभी वर्ग मिलकर सद्भाव और एकता को मजबूत करें, ताकि देश की सामाजिक संरचना और अधिक सुदृढ़ हो सके।

