मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए परिसर की धार्मिक प्रकृति को मंदिर माना है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भोजशाला वाग्देवी सरस्वती का मंदिर है और मुस्लिम पक्ष के मस्जिद संबंधी दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि संबंधित ढांचे की मूल धार्मिक पहचान मंदिर की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि आवंटन हेतु आवेदन कर सकता है, जिस पर निर्णय लेना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में होगा।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, जिसकी ऐतिहासिक और धार्मिक प्रकृति को साक्ष्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध पुरातात्विक साक्ष्य इस स्थल के मंदिर होने की पुष्टि करते हैं।हिंदू पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख इस बात के प्रमाण हैं कि यह स्थल मूल रूप से एक मंदिर था।वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि यह रिपोर्ट एकतरफा तरीके से तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य हिंदू पक्ष के दावों को समर्थन देना है। हालांकि, अदालत ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया।यह फैसला धार के बहुचर्चित भोजशाला विवाद में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, जिसका सामाजिक और राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।

