बाराबंकी, मुख्तार अंसारी गैंग के सक्रिय सदस्य जफर उर्फ चन्दा को उस समय बड़ा झटका लगा, जब गैंगस्टर न्यायालय ने अपराध से अर्जित उसकी लगभग चार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को मुक्त कराने संबंधी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने जिला प्रशासन द्वारा की गई कुर्की की कार्रवाई को सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया।पुलिस के अनुसार थाना कोतवाली नगर में वर्ष 2021 में दर्ज मुकदमा संख्या 369/21 में मुख्तार अंसारी तथा उसके गैंग के सदस्यों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान जफर उर्फ चन्दा की भूमिका मुख्तार अंसारी गैंग के सक्रिय सदस्य के रूप में सामने आई थी।
पुलिस जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि जफर उर्फ चन्दा लंबे समय तक मुख्तार अंसारी की सुरक्षा में असलहों के साथ एम्बुलेंस पर चलता था तथा गैंग की विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहता था। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसके विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।जांच के दौरान पुलिस ने जफर उर्फ चन्दा की संपत्तियों का भी सत्यापन किया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार उसने पिछले 10 से 12 वर्षों में मुख्तार अंसारी गैंग के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों से अवैध धन अर्जित किया और उसी धन से अपने नाम पर बड़ी मात्रा में अचल संपत्ति खरीदी। जांच में इन संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग चार करोड़ रुपये आंका गया।
पुलिस की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट बाराबंकी ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की धारा 14(1) के तहत उक्त संपत्तियों को राज्य के पक्ष में कुर्क करने का आदेश पारित किया था।इस आदेश के खिलाफ जफर उर्फ चन्दा ने गैंगस्टर न्यायालय में अपील दाखिल कर कुर्की आदेश निरस्त करने तथा संपत्ति को अवमुक्त किए जाने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त की दलीलों को आधारहीन और बलहीन मानते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।न्यायालय के इस फैसले को संगठित अपराध और अपराध से अर्जित संपत्तियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।


