गाजीपुर, राजनीति में स्थायी मित्र और स्थायी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जैसी अवधारणाओं पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सांसद अफजाल अंसारी को एक साथ दिखाई देने के बाद पूर्वांचल की राजनीति के पुराने समीकरण और विवाद फिर से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन नेताओं को लंबे समय तक एक-दूसरे का राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना गया, उनकी सहज मुलाकात यह संकेत देती है कि राजनीति में परिस्थितियों और हितों के अनुसार समीकरण बदलते रहते हैं। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दिया है।
इस संदर्भ में स्वर्गीय कृष्णानंद राय की हत्या से जुड़ी स्मृतियाँ और भावनाएँ भी पुनः चर्चा में आ गई हैं। उनके समर्थकों और समाज के एक वर्ग का मानना है कि जिन मुद्दों को लेकर कभी तीव्र राजनीतिक संघर्ष हुए थे, समय के साथ उन मुद्दों की दिशा और स्वरूप में बदलाव दिखाई देता है। ऐसे में लोगों के मन में अनेक प्रश्न उठना स्वाभाविक है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक गठजोड़ और विरोध समय-समय पर बदलते रहते हैं। यही कारण है कि अक्सर कहा जाता है कि राजनीति में न कोई स्थायी मित्र होता है और न कोई स्थायी शत्रु, बल्कि परिस्थितियाँ और राजनीतिक हित ही समीकरणों को निर्धारित करते हैं।
वहीं, कुछ सामाजिक और राजनीतिक वर्गों का मत है कि यदि किसी समुदाय की भावनाओं, संघर्षों और विश्वास का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया हो, तो यह गंभीर चिंतन और सार्वजनिक विमर्श का विषय होना चाहिए। विशेष रूप से भूमिहार समाज से जुड़े लोगों के बीच इस विषय को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्वर्गीय कृष्णानंद राय के समर्थक आज भी उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हुए उनके योगदान और व्यक्तित्व को स्मरण कर रहे हैं।हालाकि की सोशल मीडिया पर ये फोटो तेजी से वायरल हो रहा, अब देखना ये है की ये फोटो AI जनरेटेडहै या सच


