महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महामना मदनमोहन मालवीय हिंदी पत्रकारिता संस्थान एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में "डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में डिजिटल दौर में हिंदी पत्रकारिता के महत्व, विकास और बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा हुई।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला, सारस्वत अतिथि एवं राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, मुख्य वक्ता प्रबल प्रताप सिंह, संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह तथा कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि सरकार और संगठन का मूल मंत्र "राष्ट्र प्रथम" है तथा देशहित से ऊपर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति यदि राष्ट्र की सुरक्षा, स्वाभिमान या हितों के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने समाचार जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। पहले जहां समाचारों के संप्रेषण में लंबा समय लगता था, वहीं आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से खबरें कुछ ही क्षणों में लोगों तक पहुंच रही हैं।उन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि मीडिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। यदि जनता का भरोसा पत्रकारिता से कम होता है तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।संगोष्ठी में वक्ताओं ने डिजिटल युग में पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों, अवसरों और जिम्मेदारियों पर विचार व्यक्त करते हुए तथ्यपरक, निष्पक्ष और जनोन्मुख पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल दिया।


