उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं द्वारा बिजली बिल अधिक आने, मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी और तेजी से यूनिट खपत बढ़ने जैसी शिकायतें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पावर कॉरपोरेशन ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति को स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता, उनकी कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं की शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच प्रक्रिया के तहत स्मार्ट मीटरों की टेस्टिंग मध्यांचल की हाईटेक लैब में कराई गई और जांच के आधार पर एक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को भी सौंप दी गई। हालांकि अब इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विवाद इस बात को लेकर है कि जिस लैब में मीटरों की जांच की गई, वह कथित तौर पर स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए अधिकृत नहीं थी। ऐसे में रिपोर्ट की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
उपभोक्ता संगठनों और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच किसी ऐसी लैब में कराई गई, जिसके पास आवश्यक मान्यता या तकनीकी अनुमति नहीं थी, तो जांच के निष्कर्षों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है।दूसरी ओर, पावर विभाग और सरकार की तरफ से इस मामले पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सरकार स्मार्ट मीटर व्यवस्था और जांच प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर बड़ा फैसला ले सकती है।


