सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें, जमानत पर जल्द आदेश दें

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी मामले में फैसला तीन महीने से अधिक समय तक सुरक्षित (रिजर्व्ड ) न रखें। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्याय में अनावश्यक देरी से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और पक्षकारों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से जमानत मामलों में त्वरित निर्णय देने पर जोर देते हुए कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश यथासंभव उसी दिन या अधिकतम अगले दिन पारित किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पारित आदेशों को बिना विलंब के संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि पक्षकारों और आम जनता को समय पर जानकारी उपलब्ध हो सके।शीर्ष अदालत ने कहा कि लंबित फैसलों और आदेशों के अपलोड में देरी न्याय तक त्वरित पहुंच के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। अदालत ने सभी हाईकोर्टों से न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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