अधिक मास में पंचकोशी परिक्रमा का विशेष महत्व, श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका चक्र पुष्पकर्णी कुंड पर लिया संकल्प

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में अधिक मास पुरुषोत्तम मास के अवसर पर पंचकोशी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही है। श्रद्धालुओं ने मणिकर्णिका चक्र पुष्पकर्णी कुंड पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संकल्प लेकर पंचकोशी यात्रा का शुभारंभ किया। विद्वान आचार्य पं. जयेन्द्र नाथ दूबे ने विधि-विधान से श्रद्धालुओं को संकल्प कराया।

बताया जाता है कि पंचकोशी यात्रा काशी की अत्यंत प्राचीन और पौराणिक परंपरा है। यह यात्रा लगभग 25 किलोमीटर की परिधि में स्थित काशी क्षेत्र की परिक्रमा मानी जाती है। श्रद्धालु यात्रा की शुरुआत मणिकर्णिका चक्र पुष्पकर्णी कुंड से संकल्प लेकर करते हैं और यात्रा पूर्ण होने के बाद पुनः इसी स्थान पर पहुंचकर संकल्प का विसर्जन करते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और तीर्थाटन का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। काशी में पंचकोशी परिक्रमा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति के साथ मोक्षदायिनी काशी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान “हर-हर महादेव” और “जय श्री काशी विश्वनाथ” के जयघोष लगाए। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, जलपान और विश्राम की व्यवस्था भी की गई। काशी की यह पंचकोशी यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन परंपरा और काशी की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए हुए है।




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