अन्नपूर्णा देवी फाउंडेशन एवं नागरी नाटक मंडली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय संगीत कार्यक्रम की द्वितीय संध्या संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों के नाम रही। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए कलाकारों ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम की शुरुआत पुणे की विदुषी गायिका सान्या पाटनकर ने ‘राम श्री अवतारणा’ की भावपूर्ण प्रस्तुति से की। उनके साथ हारमोनियम पर पं. धर्मरथ मिश्र और तबले पर पं. ललित मिश्र ने सधे हुए अंदाज में संगत कर कार्यक्रम को सुरमयी बना दिया।
इसके बाद एल. शंकर (यूएसए) की वायलिन और तरुण भट्टाचार्य (कोलकाता) के संतूर वादन की जुगलबंदी ने समां बांध दिया। तबले पर प्रोसीनजीत पोद्दार की संगत ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया। राग हंसध्वनि की उनकी प्रस्तुति इतनी अद्भुत रही कि श्रोता देर तक तालियों से सभागार को गूंजाते रहे।पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद तरुण भट्टाचार्य का काशी में यह पहला संतूर वादन था, जिसने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। वहीं पं. एल. शंकर की डबल वायलिन ने काशी के श्रोताओं को एक नई संगीत अनुभूति प्रदान की।कार्यक्रम का शुभारंभ व्यास अध्यक्ष डा. संजय मेहता, पं. नित्यानंद जी एवं डा. आशुतोष चतुर्वेदी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।संध्या की तृतीय प्रस्तुति में मुंबई की डा. प्राची जरीवाला ने ओडिसी नृत्य के तहत मंगलाचरण, पल्लवी और शांति पाठ की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।कार्यक्रम के अंत में कलाकारों का सम्मान न्यास अध्यक्ष डा. संजय मेहता एवं न्यास सचिव डा. अजीत सैगल द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. आशुतोष चतुर्वेदी ने प्रस्तुत किया।

