कानपुर से न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक व्यक्ति अमीन को कथित तौर पर गलत पहचान के आधार पर “विक्की” बताकर रेप के एक मामले में फंसा दिया गया और उसे लगभग 5 साल तक जेल में रहना पड़ा।
आरोप है कि पुलिस ने जांच के दौरान जबरन उससे अपराध कबूल कराया। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को पर्याप्त सबूत नहीं मिले और पहचान संबंधी गंभीर त्रुटियां उजागर हुईं।कोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए आरोपी को बरी कर दिया और जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यशैली और पहचान सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
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