अलीगंज में हुए अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शहर में भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माणों की जांच तेज कर दी है। इसी बीच एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि शहर के करीब 94 प्रतिशत मकान बिना स्वीकृत नक्शे के बने हैं, जबकि केवल छह प्रतिशत भवनों के ही मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने बड़े स्तर पर एक साथ कार्रवाई करना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए एलडीए का उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि भवनों में अग्नि सुरक्षा समेत अन्य जरूरी मानकों का पालन सुनिश्चित कराना है। इसी दिशा में भवन मालिकों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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एलडीए ने नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनके तहत 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले भवनों के मालिक सेल्फ सर्टिफिकेशन देकर तत्काल सीलिंग जैसी कार्रवाई से राहत पा सकते हैं। इसके अलावा किसी भी भवन के खिलाफ बिना नोटिस जारी किए और पक्ष रखने का अवसर दिए कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की भी अलग से जांच होगी। एलडीए और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम शहर के कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण करेगी। यदि किसी संस्थान में सुरक्षा संबंधी कमियां मिलती हैं तो पहले उन्हें एक सप्ताह का समय सुधार के लिए दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उधर, अलीगंज अग्निकांड के बाद मंडलायुक्त ने एलडीए से ऐसे व्यावसायिक भवनों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिनके नक्शे स्वीकृत नहीं हैं, जिनका उपयोग स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किया जा रहा है या जहां निर्माण नियमों का उल्लंघन हुआ है।



