चुनाव आयोग की चुप्पी के बीच भाजपा का क्लीन स्वीप, कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। गुरुवार को चुनाव आयोग ने भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंप दिए। दूसरी ओर, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मामले में विवाद जारी है और पार्टी ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, कांग्रेस ने तीसरी राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन 9 जून को उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की, हालांकि आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

मामले को लेकर कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचा और नामांकन रद्द किए जाने के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई। वहीं, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल कर रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को गैरकानूनी, मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की।  

उन्होंने तर्क दिया कि नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा नजदीक है, इसलिए जल्द फैसला जरूरी है। इस पर चुनाव आयोग ने जवाब देने के लिए समय मांगा और कहा कि उसे अभी तक याचिका की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। सुनवाई टलने के बाद कांग्रेस ने मांग की कि कोर्ट के अंतिम निर्णय तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा भाजपा उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी किए जाने के साथ ही तीनों सीटों पर भाजपा की जीत औपचारिक रूप से सुनिश्चित हो गई। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जहां कांग्रेस की याचिका पर आगे की कार्रवाई होगी।


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