11 मोहर्रम के अवसर पर शहर में परंपरागत रूप से 'चुप के डंके' और दुलदुल अलम का जुलूस बड़े अकीदत और अनुशासन के साथ निकाला गया। यह जुलूस डॉ. हकीम काजिम साहब के इमामबाड़ा से प्रारंभ होकर निर्धारित मार्गों से गुजरा।
जुलूस में बड़ी संख्या में अंजुमन हैदरी के सदस्य शामिल हुए। मातमी अंजुमन के लोग शहीदाने कर्बला की याद में नौहाख्वानी और मातम करते हुए आगे बढ़ रहे थे। जुलूस का मुख्य आकर्षण ऊंट पर रखा गया पारंपरिक डंका रहा, जिसे बजाते हुए जुलूस निकाला गया। इस दौरान पूरे मार्ग पर गम और अकीदत का माहौल बना रहा।जुलूस में प्रमुख रूप से मुस्तफा जाफरी, मुर्तुजा जाफरी, जीशान जाफरी, शाहिद हुसैन, मुर्तुजा शम्सी, लियाकत अली, शराफत हुसैन, शकील अहमद और जादूगर सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
श्रद्धालुओं ने हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों को याद करते हुए उनके बताए सत्य, न्याय और इंसानियत के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।



