NCERT की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में वैदिक कालीन समाज, महिलाओं की भूमिका और वर्ण व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है। पुस्तक में बताया गया है कि शुरुआती वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा, धार्मिक अनुष्ठानों और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी का अवसर मिलता था। ऋग्वेद की कई ऋचाओं की रचना अपाला, घोषा, विश्ववारा और लोपामुद्रा जैसी महिला ऋषियों ने की थी।
महिलाओं के सम्मान का उल्लेख करते हुए पुस्तक में मनुस्मृति के प्रसिद्ध श्लोक "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः..." को भी शामिल किया गया है। हालांकि, पाठ्यपुस्तक यह भी बताती है कि समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के कारण महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई, लेकिन कृषि, शिल्प, गृह प्रबंधन और धार्मिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बनी रही।
नई किताब में गुप्त-वाकाटक काल और संगम साहित्य का हवाला देते हुए महिलाओं के सामाजिक योगदान को भी रेखांकित किया गया है। इसके अलावा, वर्ण और जाति व्यवस्था पर चर्चा करते हुए कहा गया है कि प्रारंभिक वैदिक समाज में सामाजिक पहचान केवल जन्म पर आधारित नहीं थी, बल्कि व्यवसाय, भाषा, क्षेत्र और सांस्कृतिक संबंध जैसे कई पहलुओं से तय होती थी।
पुस्तक के अनुसार, शुरुआती दौर में वर्ण व्यवस्था का आधार कार्य और दायित्व थे। बाद के समय में सामाजिक परिस्थितियों और ऐतिहासिक बदलावों के चलते यही व्यवस्था धीरे-धीरे जाति व्यवस्था के रूप में विकसित हुई।



