प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के दौरे के दूसरे चरण में रविवार देर रात स्लोवाकिया पहुंचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का स्लोवाकिया का पहला आधिकारिक दौरा है। राजधानी ब्रातिस्लावा में विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराय ब्लानार ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने भी पीएम मोदी का गर्मजोशी से अभिनंदन किया और 'वंदे मातरम' की प्रस्तुति दी। ब्रातिस्लावा कैसल में प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात की। इस दौरान पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार मोदी का ब्रेड और नमक भेंट कर स्वागत किया गया। स्लोवाकिया में इसे आतिथ्य, सम्मान और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी 13 जून से फ्रांस और स्लोवाकिया के छह दिवसीय दौरे पर हैं। वह 17 जून को फ्रांस के एवियान में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात भी प्रस्तावित है। स्लोवाकिया में 9,200 से अधिक भारतीय रहते हैं, जो मुख्य रूप से आईटी सेवाओं, डेवलपमेंट सेंटर्स और तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण स्लोवाकिया का वीजा धारक 26 यूरोपीय देशों की यात्रा कर सकता है। वहीं, ऑटोमोबाइल उद्योग स्लोवाकिया की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है। देश में हर साल 10 लाख से अधिक यात्री वाहनों का उत्पादन होता है और यहां वोक्सवैगन, किआ, जगुआर लैंड रोवर और वोल्वो जैसी कंपनियों की फैक्ट्रियां संचालित हैं। भारत और स्लोवाकिया के आर्थिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। वर्ष 2025 में भारत ने स्लोवाकिया को करीब 14,500 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जिसमें ऑटो पार्ट्स, मोबाइल फोन, टेक्सटाइल और परिधान प्रमुख रहे। वहीं, भारत स्लोवाकिया से वाहन, औद्योगिक मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और प्रोसेस्ड रबर का आयात करता है। दोनों देशों के बीच 2025 में कुल व्यापार लगभग 17,000 करोड़ रुपये का रहा। स्लोवाकिया दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के नीस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में 13 महत्वपूर्ण समझौते हुए।
अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए हाई-लेवल सिस्टम और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने पर भी सहमति बनी। बैठक के दौरान राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर भी चर्चा हुई। भारत वायुसेना के लिए प्रस्तावित 114 राफेल विमानों की डील में तकनीक हस्तांतरण और साझा उत्पादन पर जोर दे रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का फोकस 'मेक इन India' को बढ़ावा देने पर है, ताकि रक्षा उत्पादन में भारत की भागीदारी और क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके अलावा, भारत और फ्रांस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ओपन सोर्स मॉडल विकसित करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने की बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को समाधान देने वाला 'टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर' बन चुका है। वहीं, राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत की इंजीनियरिंग क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत हर साल 10 लाख से अधिक इंजीनियर तैयार करता है, जो यूरोप और अमेरिका की संयुक्त संख्या के बराबर हैं। गौरतलब है कि G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी- का समूह है। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी और 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह G7 बना। रूस को 1998 में शामिल कर इसे G8 बनाया गया था, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद यह फिर से G7 के रूप में कार्य कर रहा है।


