प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और काशी विश्वनाथ धाम तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान बनाने के लिए तीन एलिवेटेड सड़कें और एक नए पुल की योजना पर काम शुरू हो गया है। परियोजनाओं के लिए सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रशासन ने 19 गांवों और 34 मोहल्लों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक लगा दी है।जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के अनुसार, नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने रिंग रोड से राजघाट तक वरुणा नदी किनारे लगभग 21.15 किलोमीटर लंबी फोरलेन एलिवेटेड सड़क का प्रस्ताव तैयार किया है। इस सड़क से श्रद्धालु शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में प्रवेश किए बिना गंगा तट और काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंच सकेंगे, जिससे शहर के ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी।
इस एलिवेटेड रोड को चौकाघाट और पुरानापुल (सरैया) से शहर से जोड़ा जाएगा तथा यह राजघाट के पास जीटी रोड से जुड़ेगी। भविष्य में इसे प्रस्तावित गंगा सिग्नेचर ब्रिज से भी जोड़ा जा सकता है।इसके अलावा, गंगापार रिवर फ्रंट डेवलपमेंट परियोजना के तहत डोमरी से रामनगर तक छह लेन सड़क बनाने की योजना है। वहीं, सामनेघाट क्षेत्र में मौजूदा गंगा पुल और विश्वसुंदरी पुल के बीच लगभग 10 किलोमीटर लंबा एक और एलिवेटेड पुल प्रस्तावित है।
इन परियोजनाओं को देखते हुए प्रशासन ने वाराणसी शहर के कई प्रमुख इलाकों तथा पिंडरा तहसील के 19 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री और खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, ताकि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। परियोजनाएं पूरी होने के बाद वाराणसी में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होने के साथ पर्यटन और धार्मिक आवागमन को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।


