वाराणसी। धर्मनगरी काशी में ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक स्नान यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा का 84 घाटों के पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसके चलते आज रात से आगामी 15 दिनों तक उनके दर्शन बंद रहेंगे। इसके पश्चात भगवान नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे और रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ होगा।
सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंगला आरती के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। भगवान को पंचमेवा का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद अस्सी घाट से डमरू दल, महिलाओं की कलश यात्रा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ गंगाजल लेकर भव्य शोभायात्रा भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का वैदिक विधि-विधान से जलाभिषेक किया गया। इस अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व समाज में समर्पण, सेवा और लोककल्याण की भावना को मजबूत करता है।
स्नान यात्रा के दौरान दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। भक्तों ने गंगाजल, तुलसी दल, पुष्प और फल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की। इस अवसर पर भगवान को गुलाबी रंग के आकर्षक वस्त्रों से विशेष रूप से श्रृंगारित कर गर्भगृह के ऊपर बने सिंहासन पर विराजमान किया गया, जहां भक्तों ने दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।स्नान यात्रा के सफल आयोजन के साथ ही काशी पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रही। अब भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक अनवसर काल में रहेंगे और इसके बाद नवयौवन रूप में दर्शन देकर रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत करेंगे।



