मध्य प्रदेश में तबादलों के दौरान कथित भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। एक स्टिंग ऑपरेशन में मंत्रियों के स्टाफ से लेकर बाबुओं और कर्मचारियों तक पर ट्रांसफर के बदले लाखों रुपये की मांग करने के आरोप लगे हैं। स्टिंग में कई लोग कैमरे पर तबादलों के लिए रकम तय करते और सौदेबाजी करते नजर आए। स्टिंग ऑपरेशन के मुताबिक, मंत्री के स्टाफ के एक सदस्य ने RAEO के तबादले के लिए 2.5 लाख रुपये, वल्लभ भवन के एक बाबू ने स्टाफ नर्स के तबादले के लिए 5 लाख रुपये और ऊर्जा विकास निगम के एक कर्मचारी ने 4.5 लाख रुपये की मांग की। जांच के दौरान टीम ने चार मंत्रियों, एक विधायक और चार बाबू-अफसरों से संपर्क किया था। हालांकि, कुछ लोगों ने किसी भी प्रकार के लेन-देन से इनकार किया।
राज्य सरकार ने 1 जून से 16 जून तक तबादलों पर लगी रोक हटाई थी। इस दौरान विभिन्न विभागों में 20 हजार से अधिक तबादले किए गए। प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य था, लेकिन स्टिंग में कथित तौर पर ट्रांसफर कराने के लिए पैसों की मांग का खुलासा हुआ। स्टिंग के दौरान रिपोर्टर ने एजेंट बनकर दिनेश बकोरिया से संपर्क किया। बातचीत में दिनेश ने दावा किया कि स्वास्थ्य विभाग के मामलों में उसकी अच्छी पकड़ है। जब एक स्टाफ नर्स के तबादले की बात हुई तो उसने कथित तौर पर 3.5 लाख रुपये की मांग करते हुए कहा कि "मंत्री के यहां जाना पड़ता है, बिना मंत्री के यहां नहीं होता।" बातचीत के दौरान एडवांस भुगतान, पोस्ट-डेटेड चेक और काम पूरा होने के बाद शेष राशि देने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्टर के सवाल पर दिनेश ने कहा, "करा लेंगे वो तो... आप तो आम खाओ, गुठलियां मत गिनो।"
फोन पर बातचीत के बाद रिपोर्टर की मुलाकात वल्लभ भवन में अंकित अवधिया से हुई। अलग केबिन में हुई बातचीत में उसने कथित तौर पर विभिन्न पदों के तबादलों के लिए अलग-अलग रकम तय होने की बात कही। स्टाफ नर्स के ट्रांसफर के लिए 4.5 से 5 लाख रुपये की मांग की गई। बातचीत के दौरान अंकित ने रिकॉर्डिंग की आशंका जताते हुए रिपोर्टर का मोबाइल भी जांचा। उसने कहा, "आजकल मोबाइल-वोबाइल से डर लगता है।" तबादलों पर रोक हटने के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर किए गए थे। ऐसे समय में सामने आए इस स्टिंग ने तबादला प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों और सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।


