नगर निगम द्वारा शहर के भीतर संचालित मांस, मछली एवं मुर्गा बिक्री की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में इस निर्णय को व्यापारियों की आजीविका एवं नागरिकों की खान-पान की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया गया।ज्ञापनकर्ताओं ने कहा कि शहर में मांस-मछली का कारोबार करने वाले अधिकांश व्यापारी वर्षों से इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं। दुकानों को शहर से दूर स्थानांतरित किए जाने से उनका व्यापार प्रभावित होगा और हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नागरिकों को अपनी पसंद का भोजन चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में शहर के भीतर मांस एवं मछली की उपलब्धता सीमित होने से उपभोक्ताओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही आरोप लगाया गया कि इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले प्रभावित व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं से कोई व्यापक परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वच्छता और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए दुकानों को पूरी तरह हटाने के बजाय आधुनिक एवं बंद ढांचे में संचालित करने, कचरा प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा निर्धारित मानकों का पालन कराने जैसे उपाय अपनाए जाएं।


