मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को शिया मुस्लिम समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर के विभिन्न इमाम चौकों से ताजिया, जियारत और नौहा-मातम के साथ जुलूस निकाले। "या हुसैन" की सदाओं के बीच बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए और निर्धारित स्थानों पर ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक (ठंडा) किया गया।
इस दौरान शहर में विभिन्न प्रकार के आकर्षक ताजिए लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें बुर्राख, रांगे, नगीने वाले, पीतल, मोती, फूलों तथा चपरखट शैली के ताजिए विशेष रूप से शामिल थे। महीनों की मेहनत से तैयार इन ताजियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े।
संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जगह-जगह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे, जबकि सीसीटीवी कैमरों एवं अन्य निगरानी संसाधनों से पूरे आयोजन पर लगातार नजर रखी गई। पूर्व निर्धारित रूट और समय-सारिणी के अनुसार सभी जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।



