वाराणसी। मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के अमीनी और अदमापुर गांवों में प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर भूमि अधिग्रहण की आशंका के बीच रविवार को किसानों का विरोध तेज हो गया। अमीनी गांव में आयोजित महापंचायत में एक हजार से अधिक किसान और बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। महापंचायत में किसानों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पुश्तैनी जमीन ही चाहिए।
महापंचायत के दौरान किसानों ने "किसान एकता जिंदाबाद" और "जमीन हमारी मां है, इसका सौदा नहीं करेंगे" जैसे नारे लगाए। किसानों का कहना था कि खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है। यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की गई तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे।
इससे पहले सुबह से ही दोनों गांवों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित बैठक के संयोजक किसान नेता सूबेदार यादव को पुलिस ने रोक दिया, जिससे बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद किसानों ने सेवापुरी विधायक नीलरतन पटेल (नीलू) से संपर्क किया। विधायक प्रतिनिधि अदिति पटेल के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद देर शाम महापंचायत आयोजित की गई।
महापंचायत के दौरान विधायक प्रतिनिधि अदिति पटेल ने वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के अधिकारियों से स्पीकर फोन पर किसानों की बात कराई। अधिकारियों ने बताया कि अमीनी और अदमापुर गांव फिलहाल वीडीए क्षेत्र में शामिल नहीं हैं और इन गांवों के लिए विकास प्राधिकरण की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है।इसके बाद जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार ने भी किसानों से बातचीत कर भरोसा दिलाया कि उनकी सहमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि किसी परियोजना के लिए जमीन की आवश्यकता हुई तो नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी और किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
वहीं, विधायक प्रतिनिधि अदिति पटेल ने गांव में भारी पुलिस और पीएसी की तैनाती पर सवाल उठाए। किसान नेता सूबेदार यादव ने आरोप लगाया कि किसानों को खेतों तक जाने से रोका जा रहा है और क्षेत्र में भय का माहौल बनाया जा रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि किसी के साथ जबरदस्ती नहीं होगी।हालांकि प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बावजूद किसानों का रुख नहीं बदला। महापंचायत में मौजूद किसानों और महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी इच्छा के विरुद्ध भूमि अधिग्रहण का प्रयास किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



