भारतीय रेलवे ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसके तहत कानपुर के फजलगंज स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड में मालगाड़ी के इंजन पर अत्याधुनिक वाइब्रेशन मॉनीटरिंग सिस्टम का परीक्षण शुरू किया गया है। इस तकनीक के जरिए इंजन के पहियों, एक्सल और बियरिंग में आने वाली खराबी का पहले ही पता लगाया जा सकेगा।
नई प्रणाली में इंजन के पहियों और एक्सल पर विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो लगातार कंपन (वाइब्रेशन) की निगरानी करेंगे। यदि कंपन तय सीमा से अधिक होता है या किसी हिस्से में जाम होने की आशंका बनती है, तो लोको पायलट के केबिन में लगे कंप्यूटर पर तुरंत अलर्ट दिखाई देगा। इससे समय रहते आवश्यक मरम्मत कर दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सकेगा।![]() |
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक को बियरिंग निर्माता कंपनी एसकेएफ के सहयोग से विकसित किया गया है। फिलहाल इसका ट्रायल मालगाड़ी के इंजन पर किया जा रहा है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो पहले इसे वीवीआईपी और वीआईपी ट्रेनों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।
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अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तकनीक का उपयोग पहले से दिल्ली मेट्रो में किया जा रहा है और वहां इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। रेलवे को उम्मीद है कि इस प्रणाली के लागू होने से इंजन के पहियों और मोटर में आने वाली तकनीकी खराबियों का समय रहते पता चल सकेगा, जिससे ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुचारु हो सकेगा।
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