संजय सिंह, जो आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद हैं, ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता में राम मंदिर से जुड़े दान, दानपात्र चोरी और जमीन खरीद मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के नाम पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।संजय सिंह ने आरोप लगाया कि अयोध्या में स्थित एक नजूल भूमि, जिसकी सरकारी कीमत करीब 2 करोड़ 92 लाख 86 हजार रुपये थी, उसे 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया। उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेखों के अनुसार यह जमीन नजूल श्रेणी की है, जिसे बिना विधिवत फ्रीहोल्ड किए खरीदा-बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव द्वारा इसे खरीदे जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि इस सौदे में जमीन विक्रेता महंत मुरलीधर दास और गवाहों के रूप में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है। संजय सिंह के मुताबिक, जमीन की खरीद 2 अप्रैल 2024 को हुई, जबकि बाद में जुलाई 2024 में जारी दस्तावेज में भी इसे नजूल भूमि बताया गया, जिससे लेन-देन की वैधता पर संदेह बढ़ता है।आप सांसद ने दावा किया कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अयोध्या में जमीन खरीद में अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जहां कम कीमत की जमीन को कुछ ही समय में कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने कहा कि उन मामलों में भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम सामने आए थे।संजय सिंह ने दानपात्र और चढ़ावे में कथित चोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में 200 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी की आशंका है। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक कर्मचारी इस मामले में संलिप्त पाए गए हैं और अब तक नौ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। बावजूद इसके, मुख्य जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी कई लोगों ने इस प्रकार की अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी इन मुद्दों को उठाता है, उसे बदनाम करने की कोशिश की जाती है।प्रेस वार्ता में नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए संजय सिंह ने कहा कि चूंकि यह ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित किया गया है, इसलिए सरकार और प्रधानमंत्री इस मामले से जिम्मेदारी नहीं टाल सकते। उन्होंने सवाल किया कि जब दान और जमीन से जुड़े मामलों में कथित भ्रष्टाचार हो रहा था, तब जांच एजेंसियां निष्क्रिय क्यों रहीं।संजय सिंह ने मांग की कि वर्तमान ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में ईमानदार और निष्पक्ष लोगों को शामिल कर श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल किया जाना चाहिए।इस प्रेस वार्ता में पार्टी के अन्य पदाधिकारी और स्थानीय नेता भी उपस्थित


