काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय में शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया को लेकर भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने सवाल उठाए हैं। आयोग की ओर से भेजे गए एक पत्र के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय आयोग के रेटिंग बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. मुकुल पटेल ने कुलसचिव को भेजे पत्र में प्रोन्नति प्रक्रिया के दौरान न्यूनतम शैक्षणिक अनुभव संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बीएचयू में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) के तहत की जा रही प्रोन्नतियों को लेकर आयोग को बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रोन्नति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानकों का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाए। वर्तमान में आयुर्वेद संकाय में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। इस संदर्भ में आयोग ने आयुर्वेद शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक अनुभव संबंधी रेगुलेशन का हवाला दिया है। IMS-BHU के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने कहा कि आयोग द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रोन्नति प्रक्रिया नियमानुसार ही पूरी कराई जाएगी। वहीं, बीएचयू के कुलपति ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में बताया कि विश्वविद्यालय में प्रोन्नति से जुड़े अधिकांश लंबित मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मियों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट का निर्णय प्राप्त हुआ है, जिसका अध्ययन विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति कर रही है। कुलपति के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर न्यायालय के आदेशों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय, स्कूलों और चिकित्सा विज्ञान संस्थान में शिक्षण, गैर-शिक्षण तथा नर्सिंग पदों पर रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


