रिश्तों की उलझन, नौकरी का तनाव और डिप्रेशन : 24 घंटे मदद पहुंचा रहा टेलीमानस

"हेलो मैम, मैं मनोज हूं। मैं बहुत परेशान हूं। तीन वर्षों से गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशनशिप में था, लेकिन अब वह मुझे नजरअंदाज कर मेरे ही दोस्त के करीब जा रही है। मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूं। कई बार आत्महत्या का ख्याल आता है। प्लीज मेरी मदद करिए।" यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि वाराणसी के मानसिक अस्पताल में संचालित टेलीमानस सेल पर आने वाली उन सैकड़ों कॉलों में से एक है, जिनमें लोग अपने टूटते रिश्तों, मानसिक तनाव और अवसाद की पीड़ा साझा करते हैं। कॉल रिसीव करने वाली काउंसलर हर्षिता सिंह ने धैर्यपूर्वक युवक की पूरी बात सुनी और करीब आठ मिनट तक उसे समझाकर सामान्य करने का प्रयास किया।टेलीमानस सेल में प्रतिदिन ऐसे कई कॉल आते हैं। बिगड़ते रिश्ते, नौकरी न मिलने की चिंता, पढ़ाई का दबाव और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोग यहां 24 घंटे मदद मांग रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, हेल्पलाइन पर आने वाली करीब 60 प्रतिशत कॉल रिश्तों में तनाव और भावनात्मक परेशानियों से जुड़ी होती हैं। 

इन कॉलर्स की उम्र सामान्यतः 18 से 40 वर्ष के बीच होती है। प्रदेश सरकार ने ऐसे लोगों के लिए टेलीमानस सेवा शुरू की है, जो किसी कारणवश अस्पताल नहीं पहुंच पाते। वर्तमान में यह सेवा वाराणसी, गोरखपुर, आगरा और बरेली में संचालित की जा रही है। लोग टोल फ्री नंबर 14416 और 1800-891-4416 पर 24 घंटे कॉल कर अपनी मानसिक समस्याएं साझा कर सकते हैं। कॉल करने वालों की पहचान और जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। तीन शिफ्टों में संचालित इस सेवा में एक दर्जन से अधिक प्रशिक्षित काउंसलर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। काउंसलर हर्षिता सिंह बताती हैं कि उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि अलग-अलग परिस्थितियों में लोगों की प्रभावी काउंसलिंग की जा सके। पहले कॉलर की समस्या को विस्तार से सुना जाता है, फिर उसकी जानकारी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज कर उसे सरल और सकारात्मक तरीके से समझाने का प्रयास किया जाता है। काउंसलर दीपक कुमार के अनुसार, जिन लोगों के मन में आत्महत्या जैसे विचार आते हैं, उन्हें अधिक समय दिया जाता है। बातचीत के माध्यम से उनका ध्यान नकारात्मक सोच से हटाने की कोशिश की जाती है। जरूरत पड़ने पर उनके परिजनों को भी सचेत किया जाता है, ताकि समय रहते उचित सहयोग मिल सके। 

टेलीमानस सेल के नोडल अधिकारी एवं मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार सिंह बताते हैं कि मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहे लोगों के लिए यह सेवा बेहद कारगर साबित हो रही है। यहां प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक कॉल प्राप्त होती हैं। लोगों को समय पर भावनात्मक सहारा और विशेषज्ञ सलाह मिल रही है, जिससे कई मामलों में गंभीर मानसिक संकट को टाला जा सका है। सेल में दीपक कुमार, हर्षिता सिंह, रेशम पाल, नेहा उपाध्याय, अन्नय त्रिपाठी, मोनिका सिंह, ज्योति सिंह, संजीव कुमार, मनोज, जावेद, पंकज और प्रिंस सहित कई काउंसलर अलग-अलग शिफ्टों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच टेलीमानस उन लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है, जो अपनी समस्याएं किसी के सामने खुलकर नहीं रख पाते। एक फोन कॉल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। एक फोन कॉल न केवल उनकी बात सुनता है, बल्कि उन्हें जीवन के प्रति नया नजरिया और आगे बढ़ने का हौसला भी देता है।


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