केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरा उत्पादन से जुड़ी अपनी कृषि परियोजना के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) की योजना के तहत 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। यह बोर्ड कृषि मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, जिसके चलते इस मामले ने हितों के टकराव को लेकर बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार, राजस्थान के पीह गांव में स्थित चौधरी के फार्म पर स्थापित परियोजना की कुल लागत करीब 1.99 करोड़ रुपये है। योजना के नियमों के तहत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, यानी 99.60 लाख रुपये, सब्सिडी के रूप में स्वीकृत किए गए।
बताया गया है कि परियोजना के लिए भागीरथ चौधरी ने एचडीएफसी बैंक से लगभग 1.49 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। मार्च 2026 में परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे उनके बैंक ऋण खाते में भेज दी गई।
इस मामले में सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि कृषि राज्य मंत्री के तौर पर भागीरथ चौधरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं। हालांकि, उनके कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि परियोजना को मंजूरी देने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी में वह शामिल नहीं थे और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई।



