देहरादून: जलवायु परिवर्तन का असर हिमालयी क्षेत्र में तेजी से दिखाई दे रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हिमालय में रात का तापमान लगातार बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। शोध के मुताबिक, हर साल करीब 22 गीगाटन बर्फ समाप्त हो रही है, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।वैज्ञानिकों का कहना है कि रात में पर्याप्त ठंड न पड़ने के कारण ग्लेशियरों को दोबारा जमने का समय नहीं मिल पा रहा है। इससे बर्फ के पिघलने की गति बढ़ रही है और हिमालय का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि तापमान में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो हिमालय से निकलने वाली नदियों के जल प्रवाह, पेयजल उपलब्धता, कृषि और करोड़ों लोगों की आजीविका पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसके अलावा बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।शोधकर्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, हिमालयी क्षेत्रों की नियमित निगरानी और संरक्षण संबंधी उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई है।
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