बरेली की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने रिश्वत लेने के दोषी पाए गए एक लेखपाल को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह हजारों लोगों के सपनों और उनके अधिकारों का हनन करता है।
मामले के अनुसार, नवाबगंज तहसील क्षेत्र के किसान रामपाल सिंह ने वर्ष 2020 में भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी की कृषि भूमि से जुड़े कार्य के बदले हल्का लेखपाल रामचंद्र ने चार हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी और रकम न देने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी।
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शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ट्रैप टीम ने योजना बनाकर आरोपी लेखपाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने के बाद मामले की सुनवाई विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत में हुई।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्वतखोरी से न केवल आम नागरिक प्रभावित होते हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की निष्पक्षता और जनता का विश्वास भी कमजोर पड़ता है।
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