नागरी प्रचारिणी सभा के 134वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर विशेश्वरगंज स्थित सभा परिसर से भव्य पदयात्रा निकाली गई। वर्ष 1893 में स्थापित इस ऐतिहासिक संस्था के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पदयात्रा में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों, शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया।
पदयात्रा विशेश्वरगंज से प्रारंभ होकर मैदागिन, कबीरचौरा, पिपलानी, लहुराबीर चौराहा होते हुए राजकीय क्वींस कॉलेज पहुंची। इस दौरान प्रतिभागी "हिंदी के लिए दो कदम, नागरी के लिए दो कदम" का उद्घोष करते हुए हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देते रहे। साथ ही जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल समेत हिंदी के महान साहित्यकारों के नामों का स्मरण कर उनके योगदान को नमन किया गया।
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राजकीय क्वींस कॉलेज पहुंचने पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी भाषा के विकास और नागरी प्रचारिणी सभा की ऐतिहासिक भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि नागरी प्रचारिणी सभा के तीनों संस्थापक—श्याम सुंदर दास, रामनारायण मिश्र और शिवकुमार सिंह—ने राजकीय क्वींस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। उनके प्रयासों से वर्ष 1893 में इस संस्था की स्थापना हुई, जिसने हिंदी भाषा और देवनागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक योगदान दिया।
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