गुरुग्राम में हाल ही में हुई पुलिस मुठभेड़ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एनकाउंटर में मारे गए तीन युवकों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके बेटों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और वे परिवार के इकलौते सहारा थे। ऐसे में उन्हें गोली मारने के बजाय गिरफ्तार किया जा सकता था।दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में चार बदमाश मारे गए। वहीं, एक घायल आरोपी को गिरफ्तार कर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी एक अंतरराज्यीय रंगदारी गिरोह से जुड़े थे और हाल ही में गुरुग्राम में एक कारोबारी के घर पर हुई फायरिंग की घटना में शामिल थे।

घटना के बाद मृतकों के परिजन लगातार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि पुलिस चाहती तो आरोपियों को जीवित पकड़ सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और न्याय दिलाने की मांग की है।मामले को लेकर अब पुलिस के दावों और परिजनों के आरोपों के बीच बहस तेज हो गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार थी या नहीं।
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