उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 10 से 12 साल पहले जमीन या मकान खरीदने वाले करीब तीन हजार लोग आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ गए हैं। विभाग ने वर्षों पुराने संपत्ति सौदों की फाइलें दोबारा खोलते हुए धारा 131(1ए) के तहत नोटिस जारी किए हैं। नोटिस पाने वालों से संपत्ति खरीद में खर्च की गई रकम का स्रोत, आय का विवरण, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है।आयकर विभाग को संदेह है कि कई लोगों ने संपत्ति खरीद के दौरान वास्तविक निवेश छिपाया, आय के स्रोत की गलत जानकारी दी और रजिस्ट्री में कम कीमत दिखाकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की। विभागीय सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में करीब 200 से 250 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की आशंका जताई गई है।
जांच के दौरान पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड, बैंक खातों के लेन-देन, आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या तय समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो उसके खिलाफ आयकर अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों को आयकर विभाग की जांच शाखा को सौंपा जाएगा।
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सूत्रों के अनुसार कानपुर, आगरा और नोएडा में डेढ़ से दो दर्जन संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके अलावा बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, शामली और उत्तराखंड के देहरादून सहित कई शहरों में भी संपत्ति खरीद में अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं।जांच के दायरे में ऐसे मामले भी हैं, जिनमें वर्षों पहले लाखों रुपये का मकान या जमीन खरीदने वाले लोगों से अब धन के स्रोत का विवरण मांगा जा रहा है। कानपुर के माल रोड क्षेत्र के एक व्यक्ति और एक कारोबारी को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं।
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आयकर विशेषज्ञ शिवा गुप्ता के अनुसार विभाग 10 से 12 साल पुराने संपत्ति सौदों की जांच इसलिए कर रहा है क्योंकि उसे संदेह है कि खरीद में इस्तेमाल की गई रकम का वास्तविक स्रोत छिपाया गया या गलत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें तय समय के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ सही जवाब देना चाहिए, अन्यथा विभाग कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
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