अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से अब तक की जांच रिपोर्ट भी तलब की गई है। मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को होगी।
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले से जुड़ी कुल चार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें हिंदू धर्म परिषद की याचिका भी शामिल है, जिसमें अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। अन्य याचिकाओं में सीबीआई जांच, सीबीआई की विशेष जांच टीम गठित करने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
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याचिकाकर्ताओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह और अजय कुमार राय समेत अन्य लोग शामिल हैं। नरेंद्र गोस्वामी ने अपनी याचिका में मांग की है कि मंदिर के दान से जुड़े सभी दस्तावेज और सबूत सुरक्षित रखे जाएं तथा जांच प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि मंदिर ट्रस्ट देवता की संपत्ति का प्रबंधन करता है, इसलिए उसके वित्तीय कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता अनिवार्य है।
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इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक जांच में चढ़ावे की गिनती व्यवस्था में कई गंभीर अनियमितताओं और सुरक्षा संबंधी खामियों की ओर संकेत किया गया है। जांच के दौरान अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, याचिकाओं में एसआईटी के गठन पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना एफआईआर दर्ज किए एसआईटी का गठन किया गया, इसलिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। याचिकाओं में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय का नाम शामिल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह करने का निर्णय लिया है।
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