कर्नाटक के बहुचर्चित धर्मस्थल कथित सीक्रेट मर्डर और शवों को गुप्त रूप से दफनाने के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट बेल्थांगडी की अदालत में दाखिल कर दी है। करीब एक साल तक चली जांच के बाद तैयार की गई 7,005 पन्नों की रिपोर्ट में SIT ने कहा है कि शिकायतकर्ता और पूर्व सफाईकर्मी सी.एन. चिन्नैया द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब चिन्नैया ने दावा किया था कि बीच धर्मस्थल क्षेत्र में कई महिलाओं और नाबालिगों की हत्या के बाद उनके शवों को गुप्त रूप से दफनाया गया। इन आरोपों के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था। SIT ने कई महीनों तक घटनास्थलों की खुदाई कराई, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की और सैकड़ों लोगों से पूछताछ की।
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SIT की रिपोर्ट में 255 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट, बरामद हड्डियों और अन्य नमूनों की जांच, साथ ही लगभग 4 टेराबाइट डिजिटल साक्ष्य शामिल किए गए हैं। जांच के दौरान जिन स्थानों को चिन्नैया ने कथित दफन स्थल बताया था, वहां व्यापक खुदाई की गई, लेकिन आरोपों के अनुरूप कोई निर्णायक साक्ष्य नहीं मिला।
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जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि चिन्नैया के कई बयानों में विरोधाभास था और उनके दावों का समर्थन करने वाले विश्वसनीय सबूत उपलब्ध नहीं हैं। रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित साजिश से जोड़ते हुए कहा गया है कि जांच में लगाए गए गंभीर आरोप साबित नहीं हो सके।
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अब SIT की अंतिम रिपोर्ट अदालत के समक्ष है। अदालत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद तय करेगी कि मामले को बंद किया जाए या आगे किसी अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले में जांच का चरण समाप्त हो गया है और अब सभी की नजर अदालत के अगले फैसले पर टिकी है।



