धर्म और आस्था की नगरी काशी में विश्व प्रसिद्ध तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का शुभारंभ मंगला आरती के साथ हुआ। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा।
करीब ढाई सौ वर्ष पुरानी परंपरा से जुड़ा काशी का रथयात्रा मेला देश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसे पूर्वांचल के सबसे बड़े लक्खा मेलों में गिना जाता है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। पुरी के बाद वाराणसी की रथयात्रा अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए विशेष पहचान रखती है।
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नगर भ्रमण के बाद भगवान जगन्नाथ मौसी के घर विश्राम के लिए पहुंचे थे। सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंगला आरती के बाद भगवान के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के प्रथम दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
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दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पूरे वर्ष इस मेले का इंतजार करते हैं। उनका कहना था कि परिवार के सभी सदस्य हर साल रथयात्रा में शामिल होकर महाप्रभु के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।वही क्षेत्र में वृहद मेला लगाया गया है। जहाँ विशेषरूप से इस मेले में मिलने वाली नानखटाई की कई दुकानें सजी है। इनके साथ ही खाने पीने के स्टाॅल, खिलौने, झूला चरखी भी लगाए गए हैं।
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