आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रोफेसर हरिहरनाथ त्रिपाठी फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित ‘संबोधी सभागार’ में “भारत की शिक्षा व्यवस्था के समक्ष चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।संगोष्ठी में वक्ताओं ने छात्रों के शैक्षणिक, सामाजिक एवं चारित्रिक निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को अतुलनीय बताया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से आधुनिक युग तक शिक्षकों के सामने कर्तव्यबोध और विभिन्न चुनौतियां रही हैं, लेकिन शिक्षक अपने दायित्वों का निरंतर निर्वहन कर रहे हैं। समाज को भी शिक्षकों के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवसाय नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का केंद्र बिंदु होनी चाहिए। साथ ही बदलते समय के अनुरूप शिक्षा नीति को पुनर्परिभाषित करने और ग्रामीण तथा शहरी शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर हरिहरनाथ त्रिपाठी फाउंडेशन की ओर से वाराणसी समेत आठ जिलों के 90 शिक्षकों को विशिष्ट अध्यापक सम्मान एवं अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. अंजली वाजपेयी, डॉ. धीरज किशोर, डॉ. सरोज उपाध्याय, डॉ. सुप्रिया सिंह और विभा राय ने प्रमुख रूप से विचार रखे। वहीं श्री हरिहर चौबे, प्रो. संजय सिवाच, डॉ. निरपेक्ष कुमार, डॉ. सुमित सिंह, डॉ. ओ.पी. राय, डॉ. मयंक त्रिपाठी, श्री विनोद, श्री वैभव त्रिपाठी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्रो. क्षेमेन्द्र मणि त्रिपाठी (विधि संकाय, बीएचयू) ने किया।



