केंद्र सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल नीति को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। दिल्ली में आयोजित एक परिचर्चा में एक्सपर्ट्स ने कहा कि E20 ईंधन से पर्यावरण, भूजल, गाड़ियों के माइलेज और कृषि व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। उन्होंने E20 को बंद कर पेट्रोल में 10% एथेनॉल यानी E10 पर वापस लौटने की मांग की।
दिल्ली साइंस फोरम के वैज्ञानिक डी. रघुनंदन ने कहा कि एथेनॉल नीति के कारण खेती का रुख ‘भोजन से ईंधन’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि एथेनॉल उत्पादन में मक्के की बढ़ती खपत के चलते भारत को अब घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए मक्का आयात करना पड़ रहा है।
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नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने कहा कि सरकार ने चावल और चीनी के अतिरिक्त स्टॉक को खपाने के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया। वहीं, पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन ने भारत के एथेनॉल मॉडल की तुलना ब्राजील से करने को गलत बताया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में भारत के कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई।
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विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि E20 के कारण कुछ वाहनों में माइलेज कम हो सकता है और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की कीमतों में कमी करने और E20 नीति की दोबारा समीक्षा करने की मांग की।
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