नाग पंचमी से पहले काशी के जैतपुरा स्थित प्राचीन नागकूप में तैयारियां शुरू हो गई हैं। नाग देवता को समर्पित यह पवित्र स्थल धार्मिक आस्था के साथ अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। इसे कारकोटक नाग तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है और मान्यता है कि यह महर्षि पतंजलि की तपोस्थली रही है।
मंदिर के पुजारी पंडित कुंदन के अनुसार, महर्षि पतंजलि को शेषनाग का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने यहां वर्षों तक तपस्या की थी। नागकूप के भीतर प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है, जिसके दर्शन विशेष अवसर पर कूप की सफाई के दौरान ही हो पाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कूप के भीतर एक गहरा मार्ग है, जिसे नागलोक अथवा पाताल लोक से जुड़ा माना जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर यहां नाग देवता, महर्षि पतंजलि और उनके गुरु महर्षि पाणिनि की पूजा का विशेष विधान है। इसी कारण इसे ‘छोटे गुरु-बड़े गुरु’ की पूजा का स्थल भी कहा जाता है।
मान्यता है कि नाग पंचमी पर यहां कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं। नाग पंचमी को लेकर मंदिर परिसर में साफ-सफाई और अन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं, ताकि श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकें।




